पाठ्यक्रम: GS1/ समाज, GS2/ स्वास्थ्य/ शासन, GS3/ अर्थव्यवस्था
संदर्भ
- भारत की तीव्र गति से वृद्ध होती जनसंख्या उसके अस्पताल-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणाली की सीमाओं को उजागर कर रही है, जिससे वरिष्ठ नागरिकों के लिए एक व्यापक दीर्घकालिक देखभाल तंत्र की आवश्यकता उत्पन्न हो रही है।
वरिष्ठ नागरिक देखभाल प्रणाली की आवश्यकता
- संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की भारत एजिंग रिपोर्ट 2023 के अनुसार, भारत की वृद्ध जनसंख्या वर्तमान में लगभग 14.9 करोड़ है, जो 2050 तक बढ़कर लगभग 34.7 करोड़ हो जाएगी। इसका अर्थ है कि प्रत्येक पाँच में से एक भारतीय 60 वर्ष से अधिक आयु का होगा।
- नीति आयोग की सीनियर केयर पोजीशन पेपर 2024 में उल्लेख है कि 75% से अधिक वृद्ध भारतीय कम-से-कम एक दीर्घकालिक रोग से पीड़ित हैं, जबकि केवल लगभग 18% के पास किसी प्रकार का स्वास्थ्य बीमा है।
- वरिष्ठ नागरिकों को प्रायः एक साथ कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जैसे उच्च रक्तचाप, मधुमेह, गठिया, पार्किंसन रोग आदि।
- इन स्थितियों के लिए निरंतर निगरानी, पुनर्वास और समन्वित देखभाल की आवश्यकता होती है, न कि केवल अल्पकालिक अस्पताल उपचार की।
- शहरीकरण और एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति पारंपरिक परिवार-आधारित सहयोग को कम कर रही है।
भारत की वरिष्ठ नागरिक देखभाल प्रणाली में संरचनात्मक अंतराल
- अस्पताल-केंद्रित स्वास्थ्य मॉडल: भारत की स्वास्थ्य प्रणाली मुख्यतः तीव्र रोगों के उपचार हेतु डिज़ाइन की गई है, जबकि वरिष्ठ नागरिकों को निरंतर और बहु-विशेषज्ञता आधारित देखभाल की आवश्यकता होती है।
- जेरियाट्रिक विशेषज्ञों की कमी: भारत में 15 करोड़ से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रमाणित जेरियाट्रिशियन की संख्या 1,000 से भी कम है।
- जेरियाट्रिक चिकित्सा की उपेक्षा: यह चिकित्सा शाखा अभी भी उपेक्षित है और प्रशिक्षण के अवसर सीमित हैं।
- कमज़ोर चिकित्सा आपूर्ति श्रृंखला: द्वितीय और तृतीय श्रेणी के शहरों में दवाओं, सहायक उपकरणों, पुनर्वास साधनों एवं चिकित्सा उपभोग्य सामग्रियों की कमी रहती है।
- विखंडित डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली: अस्पतालों, क्लीनिकों और घरेलू देखभाल प्रदाताओं के बीच स्वास्थ्य अभिलेख एकीकृत नहीं हैं।
- अपर्याप्त दूरस्थ निगरानी और टेलीमेडिसिन: दीर्घकालिक रोगों के लिए वरिष्ठ नागरिकों हेतु इन सेवाओं का विकास अभी भी अपर्याप्त है।
भारत में वरिष्ठ नागरिक देखभाल हेतु सरकारी प्रयास
- अटल पेंशन योजना (APY): 2015 में शुरू की गई, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को वृद्धावस्था में आय सुरक्षा प्रदान करती है। 60 वर्ष के बाद ₹1,000–₹5,000 मासिक पेंशन सुनिश्चित करती है।
- राष्ट्रीय वयोश्री योजना (RVY): 2017 में शुरू की गई, बीपीएल वरिष्ठ नागरिकों या ₹15,000/माह से कम आय वाले व्यक्तियों को सहायक उपकरण (श्रवण यंत्र, छड़ी, व्हीलचेयर आदि) वितरित करती है।
- SAGE पोर्टल (सीनियर केयर एजिंग ग्रोथ इंजन ): वरिष्ठ नागरिक देखभाल सेवाओं में स्टार्ट-अप और नवाचार को प्रोत्साहित करता है, जिससे सिल्वर इकॉनमी का विकास होता है।
- आयुष्मान भारत – पीएम-जय (PMJAY): 70 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को 4.5 करोड़ परिवारों के माध्यम से ₹5 लाख वार्षिक स्वास्थ्य कवरेज प्रदान करता है।
- माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007: बच्चों और उत्तराधिकारियों को अपने माता-पिता का भरण-पोषण करने का कानूनी दायित्व सौंपता है।
- राज्य सरकारों को वृद्धाश्रम स्थापित करने और वरिष्ठ नागरिक कल्याण सेवाएँ सुनिश्चित करने का निर्देश देता है।
आगे की राह
- कुशल कार्यबल विकास: नर्सों, देखभालकर्ताओं, फिजियोथेरेपिस्टों और केयर कम्पैनियन्स के लिए मान्यता प्राप्त प्रशिक्षण कार्यक्रम विकसित किए जाने चाहिए।
- घर-आधारित और सामुदायिक देखभाल: वरिष्ठ नागरिकों में अनावश्यक अस्पताल भर्ती को कम करने हेतु घरेलू स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाना चाहिए।
- दीर्घकालिक रोग प्रबंधन हेतु टेलीमेडिसिन और दूरस्थ निगरानी प्रणालियों को सुदृढ़ किया जाना चाहिए।
- डिजिटल स्वास्थ्य अवसंरचना: वरिष्ठ नागरिक देखभाल सेवाओं को आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) से एकीकृत किया जाना चाहिए।
- सिल्वर इकॉनमी में नवाचार को प्रोत्साहन: सहायक तकनीकों, एआई-आधारित स्वास्थ्य निगरानी उपकरणों और वरिष्ठ नागरिकों की आवश्यकताओं के अनुरूप उपयोगकर्ता-अनुकूल अनुप्रयोग विकसित करने वाले स्टार्ट-अप्स को समर्थन दिया जाना चाहिए।
- सामाजिक दृष्टिकोण में परिवर्तन: समाज को पेशेवर वरिष्ठ नागरिक देखभाल को पारिवारिक सहयोग का जिम्मेदार विस्तार मानना चाहिए, न कि जिम्मेदारी से विमुख होना।
स्रोत: TH
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